निहंग सिख

निहंग सिख उत्तराखंड रवाना, नगरासू विवाद के बाद तनावपूर्ण हालात

उत्तराखंड में निहंग सिखों को लेकर उठा मामला शांत होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ, आज नगरासू गुरुद्वारे में निहंग सिखों के बयान और वहां प्रशासन के द्वारा अपनाए गए रवैए को लेकर प्रदर्शन किया गया तो दूसरी तरफ मोहाली से निहंग सिख उत्तराखंड की ओर कूच कर गए हैं। चंडीगढ़ और पंजाब के मोहाली से डेढ़ सौ से ज्यादा निहंग सिख उत्तराखंड की ओर आ रहे हैं।

एक तरफ, निहंग सिखों का यहां आना हो रहा है तो दूसरी तरफ, उत्तराखंड क्रांति दल और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा भी लगातार आक्रामक मोड में हैं। यूकेडी और स्वाभिमान मोर्चे का कहना है कि नगरासू विवाद दो पार्टियों के बीच का विवाद था, इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। स्वाभिमान मोर्चा के नेता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि इस विवाद को सोशल मीडिया पर जबरदस्ती उत्तराखंड बनाम सिख का बनाया जा रहा है। हालांकि यह सिर्फ दो पक्षों के बीच का विवाद है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं, दूसरी तरफ, निहंग सिखों ने उत्तराखंड की तरफ कूच करने से पहले मोहाली के सोहना गुरुद्वारे में एक मीटिंग की। इस मीटिंग में उन्होंने कहा कि सिखों के अधिकारों के खिलाफ कुछ साजिशें रची जा रही हैं। लगभग धमकी भरे अंदाज में उन्होंने कहा कि हमारी यह अरदास को प्रार्थना समझने की भूल ना करें। यह हमारा संकल्प है। निहंगों ने साफ कहा कि वह कर्णप्रयाग में हुई घटना से नाराज हैं और वह लोग अपने साथियों को वापस लेकर आएंगे। निहंगों ने इसके साथ ही कहा है कि वह उत्तराखंड आकर यहां सिखों के साथ किए जा रहे व्यवहार का निरीक्षण करेंगे। उसके बाद हम हेमकुंड साहिब चले जाएंगे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी साफ किया है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि हेमकुंड साहिब आने वाले हर श्रद्धालु का सम्मान किया जाएगा।

बता दें कि 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में स्थानीय लोगों और कुछ निहंग सिखों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। मामूली पार्किंग विवाद में निहंग सिखों ने तलवारें निकाल ली थीं। इन्होंने सिर्फ तलवारें निकाली नहीं बल्कि हमला भी किया। इसमें कई स्थानीय लोग घायल हो गए थे। एक होटल व्यवसायी की हालत गंभीर होने की वजह से उन्हें एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स में लाया गया।

इस घटना के विरोध में व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने चक्काजाम किया। करीब पांच घंटे तक चले चक्काजाम के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और चार आरोपी निहंगों को गिरफ्तार कर लिया। फिर 20 जून को सिख समुदाय ने भी मुकदमा दर्ज करवाया। सिख समुदाय की तरफ से आरोप लगाए गए कि निहंगों ने आत्मरक्षा में कदम उठाया था लेकिन पुलिस ने सिर्फ एकतरफा कार्रवाई की। इसके बाद कर्णप्रयाग कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। 

नगरासू में हुआ विवाद
20 जून को ही नगरासू में विवाद हो गया। यहां पर कुछ निहंग सिखों ने गुरुद्वारे की छत पर कब्जा कर लिया। यह निहंग सिख स्थानीय गुरुद्वारे के रवैए से नाराज बताए जा रहे थे। हालांकि इस दौरान बयान ये भी आए कि गुरुद्वार प्रबंधकों और निहंगों के बीच लंगर के दौरान विवाद हुआ था। उसके बाद सात निहंगों ने छत पर कब्जा कर लिया और वहां से नीचे आने के लिए वह तैयार नहीं थे। इस पर पुलिस और प्रशासन बल वहां पर पहुंच गया। करीब चार दिन बाद काफी मान-मनोव्वल के बाद यह निहंग नीचे उतरे तो एक नए विवाद को जन्म मिल गया।

दरअसल इन निहंगों में से एक निहंग सिख ने लगभग धमकी भरे अंदाज में गढ़वालियों पर निशाना साधा। इसके विरोध में फिर उत्तराखंड क्रांति दल और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा साथ आए और इन्होंने निष्पक्ष जांच की बात की। इसके लिए आज इनकी तरफ से एक रैली भी निकाली गई।

अब निहंग सिखों का जत्था उत्तराखंड की तरफ पहुंच रहा है। इसको देखते हुए  हिमाचल और यूपी बॉर्डर पर आईटीबीप, पीएसी को तैनात कर दिया गया है। प्रशासन हाई अलर्ट पर है और सबसे शांति बरतने की अपील की गई है।

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