कहीं आपके साथ ना हो विदेश में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी
आए दिन हम ऐसी कई खबरें देखते हैं जहां पर विदेश में होटल का मालिक नौकरी के नाम पर प्रताड़ित करता है। बुरी स्थिति में रखता है और आम तौर पर पासपोर्ट जब्त कर लोगों को लाचार कर देता है। कई बार लोग टूरिस्ट वीजा पर नौकरी के लिए जाते हैं। टूरिस्ट वीजा खत्म होते ही मालिक लेबर कार्ड या वीजा एक्स्टेंड करने में आनाकानी करने लगता है। ऐसी स्थिति में पीड़ितों के पास मालिक के हिसाब से चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।
साल 2025 में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था। म्यांमार में कई भारतीयों को बंधक बनाकर उनसे गैर-कानूनी काम करवाया जा रहा था। अधिकतर लोगों से डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड जैसे काम करवाए जाते थे। इन्हें नौकरी के नाम पर विदेश ले जाया गया लेकिन बाद में उन्हें टॉर्चर कर स्कैम कॉल सेंटर में जबरदस्ती काम करवाया जा रहा था। विदेश में नौकरी करने जाना और इसकी चाहत रखना गलत नहीं है लेकिन आपको धोखाधड़ी से बचना होगा। धोखाधड़ी से बचने का एक ही रास्ता है कि आप सही चीजों को लेकर जागरूक रहें।
नौकरी के नाम पर धोखा
चंडीगढ़ की रिया सोनकर और अजय ने कुछ लोगों को विदेश में नौकरी का ऐसा ऑफर दिया जिसे ठुकराया नहीं जा सकता था। रिया ने बताया कि एक चीनी कंपनी को कस्टमर सपोर्ट एग्जिक्यूटिव्स की आवश्यकता है। बदले में कंपनी 1 हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 90 हजार रुपए सैलरी देगी। लोग तैयार भी हुए। उन्हें बाकायदा सारे दस्तावेज दिए गए। सभी उम्मीदवारों को बिजनेस वीजा और टिकट दिया गया।
वीजा और टिकट भी नकली नहीं थे बस दिक्कत सिर्फ इतनी थी कि ये वीजा और टिकट चीन के नहीं बल्कि म्यांमार के थे। जब संबंधित लोगों ने ऐसा होने की वजह पूछी तो रिया ने उन्हें बताया कि प्लान में थोड़ा बदलाव है। अब उन्हें म्यांमार जाकर ही कंपनी ज्वाइन करनी है। रिया की इस बात को सभी लोगों ने स्वीकार भी कर लिया। नौकरी के लिए विदेश जा रहे सभी लोग खुशी-खुशी हवाई जहाज में बैठे। हवाई जहाज में बैठने के बाद जब उन लोगों ने आपस में इस पर बात करनी शुरू की तो पास ही बैठे एक भारतीय यात्री ने उनकी बात सुन ली। उस शख्स ने उन्हें अलर्ट किया कि ये फ्रॉड हो सकता है। उसने उन्हें सतर्क किया कि वे लोग एयरपोर्ट पर उतरते ही सबसे पहले भारतीय दूतावास से संपर्क साधें। जब वे सभी लोग म्यांमार में एयरपोर्ट पर उतरे तो उन्होंने देखा कि कुछ संदिग्ध लोग उनके नाम की पट्टी लेकर उन्हें लेने आए हैं लेकिन उन्होंने उनके पास जाने से पहले भारतीय दूतावास से संपर्क साधा।
दूतावास ने उन्हें किसी के साथ भी जाने से रोक दिया। भारतीय दूतावास ने इन लोगों को मार्च, 2024 में वापस देश भेज दिया। इस तरह ये लोग नरक में फंसने से बच गए। इस घटना के बाद रिया सोनकर का पूरा चिट्ठा खुला और CBI ने इस महिला के खिलाफ केस दर्ज किया। लेकिन सभी भारतीय इन लोगों की तरह खुशकिस्मत नहीं हैं। म्यांमार में कई भारतीयों के फंसे होने की खबरें पिछले साल आई थीं। इन लोगों को भी विदेश में डाटा एंट्री ऑपरेटर और होटल में नौकरी के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद म्यांमार में फर्जी कॉल सेंटर से बंदूक की नोक पर फ्रॉड कॉल करने के लिए मजबूर किया गया।
फर्जी एजेंटों का बिछा जाल
फर्जी कंसल्टेंसीज का विदेश में नौकरी के नाम पर लोगों को ठगने की कई खबरें देखने और पढ़ने को मिल जाती हैं। विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी सिर्फ फर्जी कंसल्टेंसीज तक सीमित नहीं है। कई बार परिचित लोगों के भी इस तरह फ्रॉड करने की खबरें आती हैं। उत्तराखंड के खटीमा निवासी राहुल बोरा ने प्रशासन को बताया कि उसके भाई समेत 6 लोग विदेश में नौकरी की तलाश में थे। उन्होंने अपनी पहचान वाले एक शख्स से बैंकॉक में संपर्क साधा। उस शख्स ने कहा कि वह टूरिस्ट वीजा पर उन्हें बैंकॉक बुलाकर 70 हजार रुपए महीने की नौकरी दिलवा देगा। सभी 6 लोग 25 मई, 2025 को बैंकॉक चले गए। महज 2 दिन बाद 30 मई को राहुल के भाई रोहित का फोन आया कि उन्हें बैंकॉक की जगह म्यांमार में अनजान स्थान पर ले जाया गया है। यहां उनके साथ मारपीट की जा रही है। इसी तरह, म्यांमार में फंसे लोगों के घर फिरौती के लिए कॉल आने की बात भी सामने आई।
दूसरी तरफ, कई होटल में काम करने वाले भाई-बंधु एजेंट के चक्कर में फंस जाते हैं। एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होटल में काम करने के इच्छुक लोगों से लाखों रुपए वसूलते हैं। कई बार ये एजेंट पैसे लेकर गायब हो जाते हैं तो कई बार फर्जी टिकट और वीजा देकर लूट मचाते हैं। कई बार विदेश में चले जाने के बाद भी लोगों के साथ अति की जाती है। पासपोर्ट जब्त कर अपने पास रखना और लोगों से 18-18 घंटे काम करवाना तो काफी आम है। जालसाज इस काम को इतनी बारीकी से करते हैं कि अक्सर इनके कागजों में बिना जांच-पड़ताल के खोट निकालना संभव नहीं हो पाता। यही जालसाजों के लिए लूट मचाने का आसान जरिया बन जाता है।
क्यों फंस जाते हैं लोग?
विदेश में नौकरी के नाम पर फ्रॉड इसलिए आसानी से हो जाते हैं क्योंकि लोगों के पास या तो कम या फिर सही जानकारी नहीं होती। कई लोग विदेश में अच्छी नौकरी के लालच में आकर ज्यादा पूछताछ भी नहीं करते और अनजान व्यक्ति पर भरोसा कर पैसे दे भी देते हैं। यही वो भरोसा है जो जालसाजों का काम आसान कर देता है। साल 2025 में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने देहरादून में एक बड़े फ्रॉड का पर्दाफाश किया था। इसमें शामिल लोग फर्जी ईमेल आईडी, व्हाट्सएप नंबर एवं टेलीग्राम चैनल से जाल बिछाते। ये लोग बड़ी कंपनियों का नाम इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाते।
फर्जी इंटरव्यू करते और रजिस्ट्रेशन, डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन, जॉब सिक्योरिटी के साथ ही वीजा प्रोसेसिंग के नाम पर पैसे मांगते। ऐसा ही एक मामला देहरादून के करनपुर में भी सामने आया यहां 60 लाख रुपए लूटे गए। अक्सर इन पैसों का लेन-देन कैश में किया जाता है ताकि बाद में पुलिस केस भी हो तो जल्दी से कोई फुटप्रिंट ना मिलें।
नकली और असली का फर्क पहचानें
अब जो एजेंट या एजेंसी आपको विदेश में नौकरी दिला रही है, वह जालसाज है या नहीं, इसका पता करना आसान है। भारत सरकार ने इसके लिए काफी अच्छी व्यवस्था की है। इसके लिए आपको जाना है इस वेबसाइट (www.emigrate.gov.in/#/emigrate) पर। यहां पर Recruiting Agent वाले टैब पर जाएंगे तो एक लंबी फेहरिस्त आती है। इसमें दो चीजें आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहली, List of Unregistered Agencies Against which Grievances received और दूसरी है List of Recruiting Agents। पहले वाले विकल्प में आपको पता चलेगा कि जो एजेंट आपको विदेश भेजने की बात कर रहा है, उसके खिलाफ कोई शिकायत तो दर्ज नहीं हुई है। जैसे ही आप List of Unregistered Agencies Against which Grievances received पर क्लिक करेंगे तो नए पेज पर आपको एजेंट का नाम डालना है और राज्य का चुनाव करना है।
कुछ भी शिकायत होगी तो आपको यहां पर दिख जाएगी। वहीं, List of Recruiting Agents पर क्लिक करते ही एक PDF आपको डाउनलोड करनी होगी जिसमें सभी रजिस्टर्ड एजेंट का नाम होगा। अगर इस लिस्ट में आपके एजेंट या एजेंसी का नाम है तो आप सुरक्षित हाथों में हैं लेकिन अगर उनका नाम ग्रीवांस वाली लिस्ट में है तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
एजेंट का होता है लाइसेंस
भारत सरकार साफ कहती है कि विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंट्स को विदेश मंत्रालय से एक अनिवार्य लाइसेंस नंबर मिलता है। लाइसेंस नंबर को एजेसियां अपने ऑफिस या दूसरी जगहों पर प्रमुखता से दिखाती हैं। अगर ये नंबर नहीं है तो सतर्क हो जाएं। भारत सरकार के मुताबिक कोई भी रिक्रूटिंग एजेंट सर्विस चार्ज के तौर पर 30 हजार और तय जीएसटी से ज्यादा नहीं वसूल सकता है। ध्यान रहे सर्विस चार्ज के साथ ही दूसरे चार्ज वसूलने पर एजेंट या एजेंसी को आपको भुगतान की रसीद देना अनिवार्य है।
सिर्फ यही नहीं, रजिस्टर्ड रिक्रूटमेंट एजेंट्स को प्रवासी भारतीय बीमा योजना खरीदना अनिवार्य होता है। दरअसल इस योजना के तहत माइग्रेंट वर्कर्स को 10 लाख रुपए तक का कवर मिलता है। अगर विदेशी धरती पर किसी की मौत हो जाती है या फिर घायल हो जाता है तो इस बीमा योजना से इलाज का खर्च उठाया जा सकता है। इस कवर को लेने के लिए दो साल की कवरेज के लिए 275 रुपए और तीन साल की कवरेज के लिए 375 रुपए भरने पड़ते हैं।
दोस्ती-यारी की नौकरी में सतर्कता
एजेंट या एजेंसी के बारे में पता करने का तरीका तो पता चल गया लेकिन कई बार विदेश में रह रहे दोस्तों के माध्यम से भी नौकरी का ऑफर आता है। अधिकतर होटल लाइन में विदेश में नौकरी जाने वाले एक-दूसरे के रेफरेंस से ही जाते हैं। इस स्थिति में तो आप सरकारी वेबसाइट पर जाकर चेक तो नहीं कर सकते तो फिर क्या करें? जवाब जानते हैं नई दिल्ली स्थित IMI में ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर की प्रमुख प्रोफेसर ममता मोहापात्रा से। मोहापात्रा ने ET से बात करते हुए बताया कि जिस कंपनी में नौकरी के लिए जा रहे हैं, उसके बारे में सर्च करें। कंपनी की वेबसाइट पर जाकर सारी डिटेल कन्फर्म करें।
लिंक्डइन, ग्लासडोर जैसे प्लेटफॉर्म से भी जानकारी जुटाएं। लगभग सभी देशों ने अपने यहां काम कर रही कंपनियों का एक डाटाबेस तैयार किया हुआ है। डाटाबेस चेक करें। उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी सिंगापुर की है तो Singapore’s Accounting and Corporate Regulatory Authority की बेबसाइट पर जाएं। ब्रिटेन में Companies House Database होता है। अमेरिका में Better Business Beauro पर पहुंच सकते हैं।
भारतीय दूतावास की लें मदद
जहां भी आप कंपनी को वेरीफाई करने में सफल नहीं हो रहे, वहां पर आप उस देश में स्थित इंडियन एंबेसी से संपर्क साध सकते हैं और कंपनी की डिटेल वेरीफाई कर सकते हैं। इन टिप्स के अलावा आप यह भी ध्यान रखें कि जो एजेंसी या एजेंट सही होगा, वह विदेश में नौकरी लगाने के लिए आपसे पैसे नहीं वसूलेगा। कई बार जालसाज प्रतिष्ठित कंपनियों का नाम लेकर फ्रॉड करते हैं। ऐसे में आप इन कंपनियों के मानव संसाधन विभाग से संपर्क साध सकते हैं। कई कंपनियों के पास ऑफर वेरिफिकेशन डिपार्टमेंट होते हैं। वहां से भी आप ऑफर के बारे में पता कर सकते हैं। बहुत छोटी मगर जरूरी चीज जो अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है। वह यह कि अक्सर कई जालसाज जो भी ऑफर या एग्रीमेंट आपको देते हैं, उसमें स्पेलिंग मिस्टेक्स काफी हो सकती हैं। अगर ऐसा कुछ है तो आपको अलर्ट होने की आवश्यकता है क्योंकि कोई भी प्रोफेशनल एजेंसी या कंपनी स्पेलिंग मिस्टेक से भरा ऑफर लेटर आपको नहीं देगी।
वीजा फेक या सही, कैसे चेक करें?
सारी डिटेल चेक करने के बाद आपको जो वीजा मिला है, वह नकली है या सही, ये भी पता किया जा सकता है। लगभग सभी देश अपनी तरफ से जारी वीजा वेरीफाई करने की सुविधा देते हैं। इसके लिए आप उन देशों की वीजा सर्विस के लिए तैयार की गई वेबसाइट पर जा सकते हैं और वहां पर आपको वीजा स्टेटस चेक करने का विकल्प मिल जाता है। जैसे कि संयुक्त अरब अमीरात का वीजा चेक करने के लिए आप इस (smartservices.icp.gov.ae) वेबसाइट पर जा सकते हैं।
यहां पर आपको कुछ हद तक डिटेल मिल जाती हैं। यहां यह भी याद रखिए कि अपना वीजा और दूसरी चीजें सिर्फ आधिकारिक सरकारी वेबसाइट से ही चेक करने की कोशिश करें। आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स का यूआरएल ध्यान से देखें। जैसे कि भारतीय सरकार की वेबसाइट के एड्रेस में आखिरी में हमेशा.gov.in होता है, उसी तरह यूएई के लिए ये .gov.ae/.ae होता है। ऐसे एक्सटेंशन जरूर चेक करें ताकि आप किसी फेक वेबसाइट पर ना फंस जाएं।
आखिर में अगर आप किसी देश में नौकरी करने जा रहे हैं तो वहां की जलवायु और दूसरी चुनौतियों के बारे में भी पता कर लें। इससे आप उस देश को बेहतर जान सकेंगे और समझ सकेंगे कि आप वहां पर काम कर पाएंगे या नहीं। हमेशा यह ध्यान रखें कि विदेश में ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में आप अनरजिस्टर्ड एजेंट/एजेंसी के झांसे में ना आ जाएं। क्योंकि ये आपके लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है। एजेंट के जरिए नौकरी करने जा रहे हैं तो हर डिटेल पहले कन्फर्म कर लें। उसके बाद ही किसी को पैसे दें या फिर देश छोड़ें। सारी गाइडलाइन और हिदायतों के बाद भी आपकी सावधानी सबसे ज्यादा मायने रखती है।











