नगरासू गुरुद्वारा

आखिरकार सुलझ गया नगरासू गुरुद्वारा विवाद, एक छोटा सी बात बनी तनाव की वजह

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में पिछले चार दिनों से जारी निहंग सिखों से जुड़ा एक विवाद आखिरकार थम गया है। रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में कुछ निहंग सिखों ने गुरुद्वारे की छत पर कब्जा कर लिया था। इन निहंगों ने काफी बातचीत के बाद भी नीचे उतरने से इनकार कर दिया। इस वजह से यहां पर काफी भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। हालांकि आज यानी कि मंगलवार को बातचीत सफल रही और सभी निहंग नीचे उतरकर अपने गंतव्य की ओर चले गए हैं। पिछले चार दिनों से जारी इस विवाद की चर्चा पूरे देशभर में होने लगी थी। आखिरकार इस विवाद पर विराम लग गया।

शनिवार को शुरू हुआ विवाद
इस विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई वीडियोज सामने आ रहे थे। इस गुरुद्वारे में कथित तौर पर सात निहंग सिखों ने कब्जा किया हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन निहंग सिखों ने छत पर कब्जा किया हुआ था और ये वहां से नीचे आने को तैयार नहीं थे। इस वजह से यहां पर तनाव की स्थिति बनी रही। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगरासू स्थित गुरुद्वारा लंगर दमदमा साहिब में शनिवार से यह विवाद जारी था। इस विवाद को सुलझाने के लिए शनिवार से ही जिला प्रशासन और पुलिस मौके पर मौजूद थे। बातचीत के माध्यम से समाधान निकाले जाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन तीन दिन तक कोई बात नहीं बनी।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
नगरासू स्थित गुरुद्वारे में हुए इस विवाद की जड़ आपसी मतभेद को बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक गुरुद्वारे के सेवादारों और कुछ निहंग सिख तीर्थयात्रियों के बीच किसी मुद्दे को लेकर बहस हो गई थी। इस बहस के बाद कुछ निहंग सिख गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। इन निहंग सिखों ने वहां जाने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया। गुरुद्वारा प्रबंधन ने दावा किया कि छत पर जो निहंग सिख मौजूद हैं, वो मान्यता प्राप्त निहंग संगठनों से संबंधित नहीं हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इस विवाद का कनेक्शन कर्णप्रयाग में हुए विवाद से है। कहा गया कि निहंग सिख कर्णप्रयाग विवाद के सिलसिले में पहले हिरासत में लिए गए चार निहंग सिखों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि पुलिस ने इस कनेक्शन से इनकार किया है। रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने इन दावों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं किया गया है और न ही किसी को बंधक बनाया गया है।

लंगर के दौरान हुआ झगड़ा
इस पूरे विवाद की एक तस्वीर गढ़वाल के आईजी राजीव स्वरूप ने भी पेश की थी। उन्होंने बताया कि निहंग श्रद्धालु और गुरुद्वारे के प्रबंधकों के बीच तब विवाद हुआ, जब लंगर चल रहा था। विवाद जब ज्यादा बढ़ा तो प्रबंधकों ने 112 पर कॉल करके पुलिस को बुलाया। स्वरूप ने बताया था कि पुलिस को देखकर ये निहंग डर गए और खुद को इन्होंने छत पर बंद कर दिया। स्वरूप ने यह भी जानकारी दी थी कि निहंगों से लगातार प्रशासन की तरफ बातचीत चल रही थी।

क्या बोला गुरुद्वारा?
इस घटना पर गुरुद्वारा नगरासू के बाबा बेअंत सिंह ने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कुछ लोग दो दिन पहले गुरुद्वारा साहिब पहुंचे थे। उनके अनुसार, उनके आने के बाद इन लोगों और सेवादारों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। तनाव की स्थिति होने के बावजूद गुरुद्वारा प्रबंधन ने निहंगों को रातभर रुकने की अनुमति दी। इसके साथ ही लंगर तथा पानी की व्यवस्था भी उन लोगों के लिए की। बाबा बेअंत सिंह ने जानकारी दी कि उस शाम (शनिवार) को कुल चार लोग आए हुए थे। इनके अलावा पहले से ही तीन लोग वहां मौजूद थे।

बेअंत सिंह ने बताया कि इन लोगों में से एक व्यक्ति ने गुरुद्वारे में ही रुकने की इच्छा जताई। उसने यह भी बताया कि वह लंबे समय से इस स्थान के बारे में जानकारी जुटा रहा था। बेअंत सिंह ने यह भी बताया कि इन लोगों ने इमारत को भी नुकसान पहुंचाया और साथ ही पुलिसकर्मियों पर पत्थर भी फेंके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन लोगों ने पानी की आपूर्ति बाधित की और भवन के कुछ सौर पैनलों को भी नुकसान पहुंचाया।

कर्णप्रयाग में हुए विवाद से कनेक्शन
इस घटना को कर्णप्रयाग की घटना से जोड़ने को लेकर पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर ये अफवाह फैलाई जा रही है। हालांकि इसका उस घटना से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हम इसकी जांच कर रहे हैं। बता दें कि कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब से लौट रहे निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के बीच विवाद हुआ था। दरअसल 16 जून को श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेककर लौट रहे कुछ निहंग सिख श्रद्धालुओं और कर्णप्रयाग बाजार में स्थानीय लोगों के बीच विवाद हो गया था। यह विवाद होटल की पार्किंग को लेकर हुआ था। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि निहंग सिखों ने तलवार निकाल ली और इसमें चार लोग घायल भी हो गए। बाद में पुलिस ने इस घटना के संदर्भ में पंजा के मोहाली से आए चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार कर लिया था।

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